Jai Mata Di

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A - Anand dai
T - Trikal Darshi
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A - Aambey Maa

नवरात्र क्यों मनाये जाते हैं ?

नवरात्र हिंदुओं का प्रसिद्ध पर्व है। नवरात्रि का अर्थ होता है नौ रातें। इन नौ दिनों में देवी के शक्ति रूप की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि वर्ष में चार बार आते हैं। पौष , चैत्र, आषाढ, अश्विन मास में। पौष और आषाढ माह में गुप्त नवरात्र होते है, जिनके बारे में कुछ ही लोग जानते है। भारत में धूमधाम से साल में दो नवरात्रि ही बनाएं जाते हैं, चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र। चैत्र मास शुक्ल पक्ष की एक से नौ तारीख तक के दिनों में नवरात्र मनाये जाते हैं। नवरात्रि के नौ दिन विधिवत व्रत रखकर मां दुर्गा के नौ शक्ति रूपों की पूजन-अर्चना की जाती है। आश्विन मास शुक्ल पक्ष की पहली तारीख से लेकर नवमी तक नवरात्र व्रत किए जाते हैं वे शारदीय नवरात्र कहलाते हैं। चैत्र नवरात्रि बिल्कुसल शारदीय नवरात्रों की ही तरह से देशभर में मनाएं जाते हैं। कई बार नवरात्र के घटने से पूजा आठ दिन की भी होती है। यानी एक ही दिन में दो नवरात्रों की पूजा की जाती है। कम ही लोग ये बात जानते होंगे कि चैत्र नवरात्रों को वसंत नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि शारदीय नवरात्रों की पूजा जहां भगवान राम ने आरंभ की थी वहीं चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन भगवान राम के जन्मंदिवस है और इसलिए राम जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

शारदीय नवरात्रों में जिस तरह पूरे अनुष्ठा न के साथ मां दुर्गा के नौ स्ववरूपों की पूजा होती है ठीक वैसे ही चैत्र नवरात्रों में भी होता है। अन्य पर्व की तरह नवरात्र का भी एतिहासिक पृष्ठभूमि है। इस पर्व से जुड़ी एक कथा के अनुसार मां दुर्गा ने असुर महिषासुर का वध किया था। महिषासुर को देवताओं से अजय होने का वरदान प्राप्त किया था। जिसके बाद उसने अपनी शक्तियों व बल का गलत उपयोग करना शुरू कर दिया था। महिषासुर ने सभी देवताओ का अपमान किया और उनके लिए परेशानियां पैदा की। अपनी शक्ति से उसने नरक का विस्तार स्वर्ग के द्वार तक कर दिया जिससे देवता भयभीत हो गए। महिषासुर ने स्वर्गलोक पर अधिकार कर लिया तथा सभी देवताओ को स्वर्ग से दूर पृथ्वी पर आना पड़ा। महिषासुर के इस कृत्य से सभी देवता गुस्से मे आ गए और फिर सभी देवताओ ने मिलकर देवी दुर्गा की रचना की। महिषासुर का नाश करने के लिए सभी देवताओं ने अपने अपने अस्त्र - शस्त्र देवी दुर्गा को दिए देवी दुर्गा ओर शक्तिशाली हो गईं। नौ दिन देवी दुर्गा और महिषासुर के बीच युद्ध हुआ और अंत मे देवी दुर्गा ने महिषासुर का अंत कर दिया। जिसके उपलक्ष्य में हम नौ दिनों में एक-एक दिन मां दुर्गा के हर रूप का पूजन और वंदन करते हैं। आइय जानते हैं देवी के नौ रूपों के बारे में विस्तार से ...

मां दुर्गा के नौ रूप

शैलपुत्री

ब्रह्मचारिणी

चन्द्रघंटा

कूष्माण्डा

स्कंदमाता

कात्यारानी

कालरात्रि

महागौरी

सिद्धदात्री

नवरात्र में पूजा की विधि

इस साल चैत्र नवरात्र रविवार 18 मार्च से शुरू हो रहे हैं और 25 मार्च को समाप्त होंगे। हिंदू पंचांग के अनुसार ही चैत्र नवरात्र से ही नए साल की शुरूआत होती है। नवरात्र के दौरान लोग साफ-सफाई और खान-पान की चीजों का विशेष ध्यान रखते हैं। इस बार अष्टमी और नवमी एक ही दिन 25 मार्च को होगी। हिंदू धर्म में चैत्र और शारदीय नवरात्रि का ज्यादा महत्व होता है। माना जाता है इस महीने से शुभता और ऊर्जा का आरंभ होता है और ऐसे समय में शक्ति की पूजा से घर में सुख-समृद्धि आती है। इसलिए लोग नौ दिन पूजा के लिए व्रत या उपवास भी रखते हैं। इन नौ दिनो में देवी के सभी रूपों की अराधना की जाती है। नवरात्र के एक दिन पहले घटस्थापना की जाती है। इसके बाद लगातार नों दिनों तक देवी के हर रूप की पूजा -अर्चना करके उनके मंत्र की उपासना की जाती है। साथ ही नवरात्र में मां दुर्गा का एक अखण्ड दीपक जलाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे घर में सुख-समद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। नौ दिनों तक उपवास करने के बाद नवमी वाले कन्या पूजन के बाद व्रत खोला जाता है।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त- इस वर्ष प्रतिपदा सांय 06:32 तक रहेगा। दूसरा शुभ मुहूर्त 9:00 से 10:30 तक रहेगा।

नवरात्र का महत्व

प्रतिपदा से प्रारम्भ होकर नौ दिन तक चलने वाले शारदीय और चैत्र नवरात्र यानी इन नौ दिन में जातक उपवास रखकर अपनी भौतिक, शारीरिक, आध्यात्मिक और तांत्रिक इच्छाओं को पूरा करने की कामना करता है। इन दिनों में ईश्वरीय शक्ति उपासक के साथ होती है और उसकी इच्छाओं को पूरा करने में सहायक होती है। चैत्र नवरात्र हवन पूजन और स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। इस समय चारों नवरात्र ऋतुओं के संधिकाल में होते हैं यानी इस समय मौसम में परिवर्तन होता है। इस कारण व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोरी महसूस करता है। मन को पहले की तरह दुरुस्त करने के लिए व्रत किए जाते हैं। इसी तरह शारदीय नवरात्रों में भी दिन छोटे होने लगते है और मौसम में परिवर्तन शुरू हो जाता है और साथ ही शारदीय नवरात्र में प्रकृ्ति सर्दी की चादर में लिपटने लगती है। ऋतु के परिवर्तन का प्रभाव लोगों को प्रभावित न करे, इसलिए प्राचीन काल से ही इन दिनों में नौ दिनों के उपवास का विधान है। दरअसल, इस दौरान उपवासक संतुलित और सात्विक भोजन कर अपना चिंतन और मनन ध्यान लगाकर स्वयं को भीतर से शक्तिशाली बनाता है। इससे न वह उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त करता है बल्कि वह मौसम के बदलाव को सहने के लिए आंतरिक रूप से खुद को मजूबत भी करता है। चैत्र मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नौ दिन अर्थात नवमी तक, ओर इसी प्रकार ठीक छह महीने बाद आश्चिन मास, शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक माता की साधना और सिद्धि प्रारम्भ होती है। दोनों नवरात्रो का आपने स्थान पर अपना अपना अधिक महत्व होता है।

नवरात्र वत्र में क्या खाएं और क्या न खाएं

  • नवरात्र का अर्थ भूखे रहना या फिर पोषक तत्वों से दूर रहना नहीं बल्कि तैलीय भोजन का नजरअंदाज करना है।
  • नवरात्रों के दौरान स्वस्थ रहने और बाद में इसके कोई अतिरिक्त प्रभाव ना पड़े इसके लिए आपको चाहिए कि आप अधिक से अधिक तरल और पेय पदार्थों का सेवन करें।
  • लंबे समय तक भूखे रहकर अचानक बहुत सा भोजन कर लेने से आप ना तो हेल्दी् रहेंगे और ना ही आपको उपवास का कोई फायदा होगा। ऐसे में आपको चाहिए कि आप कुछ समय के अंतराल में थोड़ा-थोड़ा खाते रहें जिससे आपको खाना जल्दी पच जाए।
  • आप नवरात्रों के व्रत के दौरान हर्बल चाय पी सकते हैं, नारियल पानी पी सकते हैं। कहने का अर्थ है आपको हल्का और पाचक खाना लेना चाहिए। जो कि आसानी से पच जाए।
  • आपको तले-भुने खाने से इसीलिए परहेज करना चाहिए ताकि आपको उपवास के लाभ मिल सकें और आपके शरीर से अतिरिक्त वसा का उपयोग हो सकें।
  • नवरात्र के व्रत के दौरान आपको तले-भुने खाने के बजाय फलों का सेवन करना चाहिए और घर में निकले फलों और सब्जियों के जूस का सेवन करना चाहिए।
  • आप चाहे तो सूखे मेवे, सूप, छाछ और फ्रूट शेक का भी सेवन कर सकते हैं।

आप यदि नवरात्र के उपवास के दौरान कम से कम तला-भुना खाना खाएंगे तो आपका रक्तचाप नियंत्रि‍त रहेगा और आपको एसीडिटी जैसी समस्या से आराम मिलेगा।
यदि आपको पेट संबंधी समस्याएं होती है या फिर आपका शुगर लेवल अधिक है तो आपको नवरात्रों के उपवास में तला-भुना खाना नहीं खाना चाहिए।

नवरात्र में व्रत करने के नियम

  • सेविंग नहीं कराएं।
  • घर को अकेला नहीं छोड़े।
  • मांसाहार न करें।
  • काले कपड़े नहीं पहनने चाहिए।
  • अनाज के सेवन से दूर रहें।
  • तंबाकू का सेवन वर्जित होता है।
  • रात्रि में पूजा करना चाहिए।
  • दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
  • जमीन पर सोना चाहिए।
  • क्रोध नही करना चाहिए।

उपवास को खोलने का उचित समय

मान्यता के अनुसार नवरात्र उपवास को खोलने का सही और उचित समय सूरज छिपने से पहले बताया गया है।